आखिरी ख़त — by Kavita Rawat
दो हफ़्ते बीत चुके थे। देवगढ़ की छोटी अदालत में विक्रम ठाकुर के केस की सुनवाई शुरू हो चुकी थी, और पूरा शहर इस ख़बर से गूंज रहा था। जिस आदमी को कभी देवगढ़ का सबसे ताक़तवर ज़मींदार समझा जाता था, वह अब कठघरे में खड़ा था, अपने ही किए की सज़ा का इंतज़ार करते हुए। मेहर हर सुनवाई में मौजूद रहती, अदित्य के साथ, कभी-कभी रुक्मिणी बुआ सा और कैलाश काका के साथ भी। पहली सुनवाई में विक्रम का वकील उसे बेकसूर…