कर्ज़ की कीमत

शर्त वाली मोहब्बत — by Kavita Rawat

रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे और शर्मा निवास की बैठक में सन्नाटा इतना गहरा था कि दीवार घड़ी की टिक-टिक भी शोर जैसी लग रही थी। अनन्या दरवाज़े की ओट में खड़ी थी, हाथ में पानी का गिलास लिए, जो कब का उसके हाथ में ठंडा हो चुका था। अंदर, पिता रघुनाथ शर्मा मेज़ पर सिर झुकाए बैठे थे और सामने कुछ काग़ज़ बिखरे पड़े थे — बैंक के नोटिस, ओवरड्यू पेमेंट की चेतावनियाँ, और एक लाल स्याही से घेरा हुआ आंकड़ा जो…