थाने की फ़ाइल और सोहम का राज़

आखिरी ख़त — by Kavita Rawat

सुबह जल्दी उठकर, मेहर ने अपने बैग में स्केचबुक और डायरी का पन्ना छुपाया, और बाहर निकलने की तैयारी की। उसने कैलाश से रास्ते में मिलते हुए कहा, "मुझे शहर जाना है, कुछ काम के सिलसिले में। शाम तक लौट आऊँगी।" कैलाश ने उसे ग़ौर से देखा, जैसे जानता हो कि यह "काम" कुछ और ही है। "देवगढ़ थाना बाज़ार के पास है, सीधी सड़क पर। अगर वहीं जा रही हैं तो।" उसकी आवाज़ में कोई हैरानी नहीं थी, बस एक थकी हुई स्वीकृति…