हल्दी की रस्म और नैना का आशीर्वाद

आखिरी ख़त — by Kavita Rawat

सुबह की पहली किरण के साथ ही हवेली जाग उठी थी। आज हल्दी की रस्म का दिन था, और पूरा घर पीले फूलों, पीले कपड़ों और उत्सव की रौनक़ से सजा हुआ था। मेहर की नींद हँसी और चूड़ियों की खनक से खुली — उसकी सहेलियाँ पहले ही उसके कमरे में घुस आई थीं। "उठो, दुल्हन रानी!" प्रिया ने चिल्लाते हुए कहा, मेहर के तकिये को हल्के से मारते हुए। "आज तुम्हारी हल्दी है, और हम तुम्हें पीला बनाकर छोड़ेंगे!" मेहर हँसते हुए…