तिजोरी की वसीयत — सच का पहला टुकड़ा

आखिरी ख़त — by Kavita Rawat

अगले दिन, बुआ सा मेहर के साथ खासतौर पर सतर्क थीं — हर बात पर नज़र, हर हरकत पर सवाल। जब मेहर सुबह की चाय के लिए नीचे आई, रुक्मिणी पहले से बैठी थीं, हाथ में एक पुरानी अख़बार की कतरन। "यह क्या है?" मेहर ने पूछा, बैठते हुए। रुक्मिणी ने कतरन उसकी तरफ़ बढ़ा दी, बिना कुछ कहे। यह दस साल पुराना एक स्थानीय अख़बार का टुकड़ा था, जिसमें एक छोटी सी ख़बर छपी थी — "देवगढ़ की एक शोधकर्ता लापता, पुलिस जाँच जारी।"…