एक शर्त और एक हामी

शर्त वाली मोहब्बत — by Kavita Rawat

सुबह ठीक साढ़े दस बजे अनन्या ने अर्जुन को फोन किया और सिर्फ इतना कहा, "मैं तैयार हूँ।" फोन के दूसरी तरफ एक पल की खामोशी रही, फिर अर्जुन की आवाज़ आई, "ठीक है, मिस शर्मा। सर को बता देता हूँ। शाम को गाड़ी भेज दी जाएगी।" फोन काटते ही अनन्या के हाथ काँपने लगे। फैसला लेना एक बात थी, उसे ज़ुबान देना बिल्कुल दूसरी। अब पीछे मुड़ने का रास्ता नहीं बचा था। शाम को वही काली सेडान घर के बाहर आकर रुकी। इस बार…