आखिरी ख़त — by Kavita Rawat
शादी की सुबह देवगढ़ में सूरज की पहली किरण के साथ ही एक अलग ही जादू लेकर आई। पूरा गाँव जैसे उत्सव के रंग में डूबा हुआ था — हर घर के दरवाज़े पर फूलों की सजावट, हर गली में हल्की सी संगीत की गूँज, और हवा में एक अजीब सी ख़ुशी जो शब्दों में बयान करना मुश्किल था। हवेली में, मेहर सुबह जल्दी उठ गई, उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था — डर से नहीं, बल्कि बेसब्री और उत्साह के मिश्रण से। उसकी सहेलियाँ और सुनीता जी…