शर्त वाली मोहब्बत — by Kavita Rawat
एक हफ़्ता बीत चुका था, और अनन्या को धीरे-धीरे राजवंश हवेली की ज़िंदगी की लय समझ आने लगी थी। सुबह दादी के साथ बगीचे में टहलना, दोपहर में कभी किताबें पढ़ना, कभी रामलाल से खाना बनाना सीखना, और शाम को वीर के लौटने का इंतज़ार — यह इंतज़ार, जिसे वह खुद से छुपाती थी, पर जो हर दिन थोड़ा गहरा होता जा रहा था। उस दिन दोपहर को दादी ने अनन्या से कहा, "बेटा, आज बाज़ार जाना है क्या? कुछ सामान चाहिए घर के लिए…