आखिरी ख़त — by Kavita Rawat
मेहर की माँ, सुनीता कपूर, अगले हफ़्ते देवगढ़ पहुँचीं। स्टेशन पर मेहर और अदित्य दोनों उनका इंतज़ार कर रहे थे, मेहर की बेचैनी साफ़ झलक रही थी। "क्या हो अगर उन्हें अदित्य पसंद न आए?" उसने ट्रेन के आने से ठीक पहले अदित्य से फुसफुसाते हुए पूछा। "तो मैं उन्हें जीतने की पूरी कोशिश करूँगा," अदित्य ने मुस्कुराते हुए कहा, हालाँकि उसकी आँखों में भी हल्की घबराहट थी। जब सुनीता जी ट्रेन से उतरीं, उन्होंने पहले…