शर्त वाली मोहब्बत — by Kavita Rawat
रात के करीब दस बजे, वीर छत पर टहल रहा था, हाथ में व्हिस्की का गिलास लिए, मन में करण वर्मा की साज़िश और अनन्या के डर के बारे में सोचते हुए। हवेली की छत से पूरा शहर रोशनी में डूबा हुआ दिखता था, और यहाँ की खामोशी उसे हमेशा सुकून देती थी। तभी सीढ़ियों की आहट सुनाई दी। अनन्या भी नींद न आने के कारण ऊपर आ गई थी, हाथ में एक शॉल लपेटे। "तुम भी सो नहीं पा रहे?" अनन्या ने पूछा, वीर के बगल में आकर खड़ी होते…