सोहम का राज़

आखिरी ख़त — by Kavita Rawat

रात की उथल-पुथल के बाद हवेली में एक अजीब-सी ख़ामोशी उतर आई थी। पुलिस की गाड़ियाँ जा चुकी थीं, विक्रम को थाने ले जाया जा चुका था, पर उसकी धमकी भरी आवाज़ अभी भी दीवारों में गूँज रही थी जैसे। मेहर रात भर सो नहीं पाई। हर बार आँख बंद करती, उसे विक्रम का चेहरा दिखता — गुस्से से लाल, नफ़रत से भरा, और वह आख़िरी वाक्य: "यह सिर्फ़ शुरुआत है, मेहर। तुमने जो शुरू किया है, उसका अंत तुम्हें बर्बाद कर देगा।"…