संगीत की रात और माँ की अंगूठी

आखिरी ख़त — by Kavita Rawat

संगीत की रात के लिए हवेली को पूरी तरह से बदल दिया गया था। एक अस्थायी मंच खड़ा किया गया था, जिसे रंग-बिरंगी रोशनियों और फूलों से सजाया गया था, और सामने कुर्सियों की क़तारें लगाई गई थीं — पूरे गाँव के लिए, क्योंकि जैसा गोपाल दास ने कहा था, यह अकेले मेहर और अदित्य की शादी नहीं थी, यह पूरे देवगढ़ का उत्सव था। शाम ढलते ही मेहमानों का आना शुरू हो गया — गाँव के हर घर से लोग, शहर से मेहर की सहेलियाँ और…