आखिरी ख़त — by Kavita Rawat
कुछ दिनों की सतर्कता के बाद, हवेली में एक अस्थायी शांति लौट आई थी, हालाँकि यह शांति नकली थी, तूफ़ान से पहले की चुप्पी जैसी। अदित्य के दोस्त की अकाउंटेंसी फ़र्म ने जाँच शुरू कर दी थी, और सोहम अपने पत्रकार स्रोतों से जानकारी जुटाने में जुटा था। एक सुबह, अदित्य के फ़ोन पर एक कॉल आई जिसने सब कुछ बदल दिया। कॉल ख़त्म करने के बाद, उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया था। "क्या हुआ?" मेहर ने पूछा, दिल में एक नई…