शर्त वाली मोहब्बत — by Kavita Rawat
अगली सुबह अनन्या की आँख देर से खुली, थकान अभी भी हड्डियों में बसी हुई थी। कुछ पल के लिए उसे समझ नहीं आया कि वह कहाँ है — अनजान कमरा, अनजान बिस्तर, अनजान खिड़की से आती धूप। फिर एक-एक करके कल की सारी बातें याद आने लगीं, और उसके पेट में एक अजीब सी गाँठ बन गई। नीचे डाइनिंग हॉल में पहुँची तो देखा दादी पहले से मेज़ पर बैठी अखबार पढ़ रही थीं। "अरे बेटा, आओ। नाश्ता कर लो।" "वीर कहाँ हैं?" अनन्या ने पूछा…